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RAJEEV JAIN – March 28, 2019

परम पूज्य उपाध्याय श्री 108 गुप्तिसागर जी के पावन चरणों में कोटि कोटि नमन।

“कामयाब” एक अद्भुत प्रयास” की सफलता पर मैं पूर्णतः आश्वस्त हूँ,
कामयाब और गुरूदेव गुप्तिसागर जी पर्यायवाची हैं।
और जब:
“फानूस बन कर जिसकी हिफाजत हवा करें,
वो शमा क्या बुझे, जिसे रोशन खुदा करें।’’

राजीव जैन

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